وسوسنٍ يتهادى للأنس
المجتث | |
| وسوسنٍ يتهادى | للأنس بالراحتين |
| نعمَ المواصلُ لو لم | يُعد بنأيٍ وبَينِ |
| كأنما خلقُهُ الفد | خَسَّةٌ من لُجينِ |
| أو أنمُلٌ بضَّةٌ ما | تركّبت في يَدينِ |
| وبينَها حارسٌ لا | ينامُ طرفةَ عَينِ |
| علا واشرفَ منها | على جمالٍ وزَينِ |
| كما علا الحاجبُ | المُنتقى على الشّعريينِ |
| مَلكٌ به حالَ دهري | بينَ الخُطوبِ وبَيني |