لهف نفسي على ديار من السـ
| لهف نفسي على ديار من السـ | ـكان أقوت فليس فيها عريب |
| ولكم حلها فأنسته أوطا | ن صباه والأهل يوماً غريب |
| فاحتسب ما أصاب قومك مجد | الدّين، واصبر، فالحادثاتُ ضُروبُ |
| هكذا الدهر: حكمه الجور والقصـ | ـدُ، وفيُه المكُروهُ، والمحبوبُ |
| إن تَخَصَّصْكمُ نوائبُ ما زَا | لت لكم دون من سواكم تنوب |
| فكذَاك القَناة ُ: يُكَسَرُ يوم الرّ | ـروع منها صدر وتبقى كعوب |