وبلغت المواضع النّقديّة فيه بعامّة - كما ذكر القِنَّوجي1 - أكثر من ثلاثمائة موضع؛ شملت جوانب متعدّدة؛ كان نقد التَّداخل من أهمّها، وأوفرها حظًّا؛ إذ أربى ما جاء منه على الثُّلث.
ويمكن الكلام عن نقدات الفيروزآباديّ من خلال النّقاط التّالية:
أ- التّوزيع الإحصائيّ للنّقدات:
بلغت المواضع النّقديّة لتداخل الأصول في (القاموس) ثلاثة عشر ومائة موضع2. وبلغ ما فيه من نقد التَّداخل في البناء الواحد سبعين
1 ينظر: البلغة في أصول اللغة462.
2 ينظر: القاموس (أبأ) 41، (أتأ) 41، (ألأ) 41، (ثأثأ) 44، (حبطأ) 47، (حفسأ) 1/16، (زأزأ) 53، (قندأ) 62، (مقأ) 66، (نوأ) 69، (نيأ) 69، (ورأ) 70، (هوأ) 73، (أزب) 75، (ثأب) 78، (تألب) 78، 0تخرب) 78، (توب) 79، (ثيب) 82، (جيب) 90، (حنزب) 99، (حوب) 99، (ددب) 106، (ذلعب) 110، (زلعب) 122، (كرب) 167، (لوب) 173، (حنت) 193، (جوث) 213، (ذحج) 243، (زرج) 245، (عهج) 255، (قلح) 303، (نتح) 311، (ندح) 312، (أفخ) 317، (تنخ) 319، (نوخ) 335، (أبد) 337، (جسد) 348، (صرد) 374، (علجد) 380، (عنجد) 385، (قمحد) 399، (قدد) 394، (قمد) 399، (مقد) 408، (ميد) 410، (جبذ) 423، (خنذ) 425، (لذذ) 431، (أمر) 439، (تمر) 455، (صمعر) 547، (بنصر) 452، (سعر) 522، (طرر) 553، (فأر) 583، (قطمر) 597، (قنبر) 599، (قنسر) 599، (هبر) 637، (كزز) 672، (مشلز) 676، (هرجس) 749، (أرط) 749، (عنظ) 900، (قنزع) 977، (مهع) 988، (نبع) 989، (هملع) 1003، (خفف) 1041، (رقف) 1052، (طلحف) 1076، (كرف) 1096، (نوف) 111، (غرق) 1180، (غرنق) 1180، (نبق) 1180، (نبق) 1194، (لوك) 1230، (بأدل) 1246، (حنتل) 1277، (ضمحل) 1324، (طهل) 1328، (ظلل) 1329، (قصعل) 1354، (قعثل) 1355، (كول) 1363، (ندل) 1372، (وول) 1381، (ترجم) 1399، (تلم) 1399، (خوم) 1427، (ددم) 1428، (ديم) 1433، (رأم) 1434، (رهم) 1435، (مرهم) 1498، (وأم) 1504، (ددن) 1543، (طين) 1566، (أبه) 1603، (دبى) 1654، (زوا) 1667، (سيي) 1674، (شصا) 1676، (شكى) 1678، (عصى) 1692، (قنا) 1710، (لدى) 1715، (ليي) 1718.