14 -يجوز عند ابن جنى تقديم الفاعل المتصل بضمير المفعول على المفعول، في نحو:
(جزى ربّه عنى عدىّ بن حاتم) ويحتجّ لذلك. (304301) .
15 -لا يفصل بين الفعل وفاعله بالأجنبى، والفصل بالظرف متجوّز فيه.(1/ 444،
16 -قد يحذف فعل الفاعل لتقدم دليل عليه من لفظه، نحو {يُسَبِّحُ لَهُ فِيهََا بِالْغُدُوِّ وَالْآصََالِ رِجََالٌ} . (2/ 133) .
17 -تدخل (ما) على الفعل، فتكفّه عن طلب الفاعل نحو: قلّما يقوم زيد، وجاز عندهم إخلاء الفعل من الفاعل، لما دخله من مشابهة حرف النفى. (1/ 482) .
1 -هذه الفوائت المستدركة على كتاب سيبويه، منها ما ليس قائله فصيحا عنده، ومنها ما لم يسمع إلا في الشعر موضع الاضطرار، ومنها ما هو لازم له، وهو دليل مناقب سيبويه ومحاسنه بأن يستدرك عليه هذا القليل من بين هذه اللغة المنتشرة.
2 -أما هذه الفوائت فهى فى (الجزء الثانى) :
تلقامة وتلعابة (2/ 404، 406) ترعاية (2/ 406، 3/ 413) قرناس (2/ 407) فرانس (2/ 407) تنوفى (2/ 407، 408) ترجمان (2/ 409) شحم أمهج (2/ 409) مهوأنّ (2/ 410، 411) عياهم (2/ 411) تماضر وترامز (2/ 412) ينابعات (2/ 412) دحندح (2/ 413) عفرّين (2/ 413) صنّبر (2/ 414) هزنبران وعفزّران (2/ 415) هديكر (2/ 416) . زيتون (2/ 416) ميسون (2/ 416) قيطون (2/ 416) هتدلع (2/ 417) قذبذب، قذّبذب (2/ 417) درداقس (2/ 418) خزرانق (2/ 418) شمنصير (2/ 418) مؤق (2/ 418) مأق (2/ 419) جبروّة (2/ 420) مسكين ومنديل (2/ 420) حوريت (2/ 420) خلبوت (2/ 420) ترقؤة (2/ 421) سمر طول (2/ 421) قرعبلانة (2/ 421) عقرّبان (2/ 423) مألك (2/ 424) أصرّى (2/ 425) إصبع، زئبل، ضئبل، خرقع (2/ 425) إزلزل (2/ 425) سراوع (2/ 426) فرنوس (2/ 426) الحبليل (2/ 426) ضهيد، عتيد الخرنباش (2/ 429) تعفرت، يرنأ (2/ 430) يستعور
(2/ 427) أرونان 2/ 427) صعفوق (2/ 427) زيزفون (2/ 428) سقلاطون (2/ 428) أطربون (2/ 429) زونزك (2/ 430) زوزى (2/ 430) زرنوق (2/ 430) الأربعاوى (2/ 426) رجل ويلمّه (2/ 426) الماطرون (2/ 428) القهوباة (2/ 429) الزّونّك (2/ 430) الضّفنّط (2/ 430) .